‘From BigBEfamily.com Our Humble Tribute to Mr. Amitabh Bachchchan FB 1673 – a poem by writer poet ad., maker…’ 001313

FB 1673 – a poem by writer poet ad., maker lyricist and dear friend Prasoon Joshi ..

बोलो कब प्रतिकार करोगे
पूछ रहा अस्तित्व तुम्हारा
कब तक ऐसे वार सहोगे
बोलो कब प्रतिकार करोगे

अग्नि वृद्ध होती जाती है
यौवन निर्झर छूट रहा है
प्रत्यंचा भर्रायी सी है
धनुष तुम्हारा टूट रहा है
कब तुम सच स्वीकार करोगे
बोलो कब प्रतिकार करोगे

कम्पन है वीणा के स्वर में
याचक सारे छन्द हो रहे
रीढ़ गर्व खोती जाती है
निर्णय सारे मंद हो रहे
क्या अब हाहाकार करोगे
बोलो कब प्रतिकार करोगे

तिमिर लिए रथ निकल पड़ा है
संसारी आक्रोश हो रहा
झुकता है संकल्प तुम्हारा
श्वेत धवल वह रोष खो रहा
कैसे सागर पार करोगे
बोलो कब प्रतिकार करोगे

कब तक रक्त मौन बैठेगा
सत्य कलश छलकाना होगा
स्वप्न बीज भी सुप्त हो रहा
धरा स्नान करना होगा
किस दिन तुम संहार करोगे
बोलो कब प्रतिकार करोगे

प्रसून जोशी