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‘From BigBEfamily.com Our Humble Tribute to Mr. Amitabh Bachchchan FB 1607 – आदर और स्नेह ।।???? आज के दिन,…’ 001401

FB 1607 – आदर और स्नेह ।।???? आज के दिन,…

FB 1607 -
आदर और स्नेह  ।।????
आज के दिन, जब 48 वष॔ के संबंध को अग्नि की ज्वाला में भस्म होते देखा है, तो आपकी रचना का एक एक शब्द मानव जीवन के सत्य का अदभुत दर्पण है  ।⚘
यदि आज्ञा हो तो इसे मैं अपने social media के मंच पर प्रदर्शित करना चाहूँगा ।

अमिताभ बच्चन 

आश्वस्त हूँ..

सर्प क्यों इतने चकित हो 
दंश का अभ्यस्त हूँ 
पी रहा हूँ विष युगों से 
सत्य हूँ आश्वस्त हूँ

ये मेरी माटी लिए है 
गंध मेरे रक्त की 
जो कहानी कह रही है 
मौन की अभिव्यक्त की 
मैं अभय ले कर चलूँगा 
ना व्यथित ना त्रस्त हूँ 

वक्ष पर हर वार से 
अंकुर मेरे उगते रहे 
और थे वे मृत्यु भय से 
जो सदा झुकते रहे
भस्म की सन्तान हूँ मैं
मैं कभी ना ध्वस्त हूँ 

है मेरा उद्गम कहाँ पर 
और कहाँ गंतव्य है 
दिख रहा है सत्य मुझको 
रूप जिसका भव्य है 
मैं स्वयम् की खोज में 
कितने युगों से व्यस्त हूँ 

है मुझे संज्ञान इसका
बुलबुला हूँ सृष्टि में 
एक लघु सी बूँद हूँ मैं 
एक शाश्वत वृष्टि में 
है नहीं सागर को पाना 
मैं नदी संन्यस्त हूँ 

प्रसून जोशी_0
FB 1607 -
आदर और स्नेह  ।।????
आज के दिन, जब 48 वष॔ के संबंध को अग्नि की ज्वाला में भस्म होते देखा है, तो आपकी रचना का एक एक शब्द मानव जीवन के सत्य का अदभुत दर्पण है  ।⚘
यदि आज्ञा हो तो इसे मैं अपने social media के मंच पर प्रदर्शित करना चाहूँगा ।

अमिताभ बच्चन 

आश्वस्त हूँ..

सर्प क्यों इतने चकित हो 
दंश का अभ्यस्त हूँ 
पी रहा हूँ विष युगों से 
सत्य हूँ आश्वस्त हूँ

ये मेरी माटी लिए है 
गंध मेरे रक्त की 
जो कहानी कह रही है 
मौन की अभिव्यक्त की 
मैं अभय ले कर चलूँगा 
ना व्यथित ना त्रस्त हूँ 

वक्ष पर हर वार से 
अंकुर मेरे उगते रहे 
और थे वे मृत्यु भय से 
जो सदा झुकते रहे
भस्म की सन्तान हूँ मैं
मैं कभी ना ध्वस्त हूँ 

है मेरा उद्गम कहाँ पर 
और कहाँ गंतव्य है 
दिख रहा है सत्य मुझको 
रूप जिसका भव्य है 
मैं स्वयम् की खोज में 
कितने युगों से व्यस्त हूँ 

है मुझे संज्ञान इसका
बुलबुला हूँ सृष्टि में 
एक लघु सी बूँद हूँ मैं 
एक शाश्वत वृष्टि में 
है नहीं सागर को पाना 
मैं नदी संन्यस्त हूँ 

प्रसून जोशी_1

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